दान की जमीन को 20 साल के लिए लीज पर देने का खेल..

पंचायत प्रतिनिधियों, शाला विकास समिति ने साठगांठ कर खेला भ्रष्टाचार का खेल

बिना विभागीय अनुमति लीज पर देने कर दिया गया प्रस्ताव

वर्तमान प्रधान पाठक ने पूर्व की गड़बड़ियों पर जताई अनभिज्ञता, लीज प्रस्ताव रद्द

बृजपाल सिंह हूरा..✍️

तखतपुर। विद्यालय को दान में मिली कृषि भूमि की उपज से प्राप्त राशि में बड़े पैमाने पर हेर फेर करने एवं दान की गई भूखंड को कुछ रसूखदारों द्वारा कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है। विकास और बच्चों के हित की जिम्मेदारी जिन पर थी उन्हीं पंचायत प्रतिनिधियों शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के कर्ताधर्ता पदाधिकारियों ने भ्रष्टाचार का खेल खेला है।
          मामला तखतपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सागर स्थित शासकीय प्राथमिक शाला एवं पूर्व माध्यमिक शाला का है जहां गांव के 13 समाजसेवियों ने वर्ष 1994 में खसरा नंबर 513, 587, 1148 कुल रकबा 7 एकड़ 19 डिसमिल भूमि स्कूल को दान की थी। उद्देश्य था कि खेती से होने वाली आय से विद्यालय और विद्यार्थियों का विकास किया जाए लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि 31 वर्षों तक इस आय के लिए बैंक खाता तक नहीं खोला गया। राशि न तो विद्यालय तक पहुंची और न ही बच्चों के हित में उपयोग हुआ।

        जांच टीम के सामने मामला प्रकाश में आया कि वर्ष 2020-21 में दान की भूमि को अवैध रूप से बिना विभागीय अनुमति के शाला समिति के सदस्य एवं पंच सुरेंद्र तिवारी को लीज पर दे दिया गया और बिना उच्चाधिकारियों की जानकारी के आय का उपयोग केवल कागजों में दिखाया गया। बिल बाउचर और रोकड़ बही मांगने पर कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। इतना ही नहीं, लीज अवधि पूरी होने से पहले ही 20 साल तक उसी लीजधारी का अवधि बढ़ाने का विरोधाभासी प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया।

          ग्रामीणों की शिकायत पर जनपद उपाध्यक्ष एवं अध्यक्ष शाला विकास समिति राकेश तिवारी ने बीईओ को जांच कराने निर्देशित किया। जिस पर बीईओ द्वारा प्राचार्य राजेंद्र चंद्रकांत, प्राचार्य गीता यादव, एबीओ पुष्पलता एक्का, प्रधान पाठक विजय जाटवर, संकुल समन्वयक नितेश सिंगरौल टीम बनाकर शिक्षा समिति के सदस्य सभापति द्वय रंजना तुलसी कौशिक, परमेश्वर पटेल के देखरेख में जांच कराई गई। जांच के दौरान पूर्व प्रधान पाठकों के बयान से अनियमितताएं उजागर हुईं। वर्तमान प्रधान पाठक ने पूर्व की गड़बड़ियों से अनभिज्ञता जताते हुए लीज प्रस्ताव रद्द कर दिया और अब  विद्यालय का बैंक खाता खुलवाने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।

नियमों को रखा ताक पर..

       विद्यालय को दान में दी गई जमीन को लीज में देने के मामले में रसूखदारों के सामने विद्यालय प्रशासन नतमस्तक रहा। 2020 में तत्कालीन सरपंच प्रतिनिधि रामसागर नागमणि को शाला प्रबंधन एवं विकास समिति का अध्यक्ष बनाकर पंच सुरेंद्र तिवारी एवं अन्य को इस समिति का सदस्य बनाया गया और इसी नियुक्ति दिनांक को ही दान की भूमि को 5 वर्ष के लिए 36 हजार रूपये प्रतिवर्ष की दर से बिना किसी विभागीय अनुमति, इश्तहार या सूचना के सीधे समिति के सदस्य सुरेन्द्र तिवारी को लीज पर दे दिया गया। उसके तीन साल बाद फिर से उसी व्यक्ति के नाम पर 2045 तक के लिए लीज की अवधि बढ़ा दी गई और उस 2023 के प्रस्ताव को 2025 से लागू होना लेख किया गया। सवाल यह उठता है कि दान छ. ग. शासन स्कूल शिक्षा विभाग उपसंचालक शिक्षा जिला बिलासपुर सर्वराकार प्रधान पाठक शासकीय प्राथमिक शाला सागर को दी गई थी तो सर्वराकार को शिक्षा विभाग से विभागीय अनुमति लेनी थी लेकिन न विभागीय अनुमति ली गई, न ही इस लीज से प्राप्त राशि के लिए कोई खाता खोला गया। सिर्फ राशि हाथ से हाथ हस्तांतरित कर भ्रष्टाचार का लंबा खेल खेला गया।

सहकारी समिति में व्यक्तिगत नाम से करा लिया पंजीयन..

      धान बेचने के लिए सेवा सहकारी समिति में पंजीयन कराना होता है। अगर दान की जमीन में कृषि होती है तो उसके उपज को बेचने के लिए संबंधित जिन्हें दान मिला है उनका पंजीयन कराया जाता है फिर अगर इसे कोई लीज, रेगहा या अधिया में लेता है तो उसे भूमि स्वामी के पंजीयन के साथ अपना रिकॉर्ड देना होता है लेकिन सागर विद्यालय का पंजीयन नहीं हुआ। सीधे सिर्फ शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के प्रस्ताव के आधार पर सेवा सहकारी समिति कुरेली में लीजधारी सुरेंद्र तिवारी के नाम पर दान की जमीन का पंजीयन कर दिया गया। चूंकि उस समय स्वयं सुरेंद्र तिवारी सेवा सहकारी समिति कुरेली के अध्यक्ष भी रहे इसलिए नियमों को ताक पर रखकर प्रक्रिया की गई। ग्रामीणों के अनुसार वर्तमान में दान की कुछ भूमि पर स्थानीय रसूखदारों का कब्जा है। यह मामला केवल एक विद्यालय का नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी…?

        पंचायत प्रतिनिधियों एवं समिति के सदस्यों द्वारा जो लिखने कहा जाता था वो मै कार्यवाही में लिखता था।
    अनिल कौशिक पूर्व प्रधान पाठक शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सागर।
          मेरी पोस्टिंग दिसंबर 2022 में हुई मुझे दान की जमीन की जानकारी नहीं थी। वर्ष 2025 में जब समिति के सदस्य सुरेन्द्र तिवारी मुझे 4500 रूपये देने पहुंचे तब मुझे जानकारी हुई।
मनोज कौशिक प्रधान पाठक प्राथमिक शाला सागर।
         कुछ माह पहले ही मेरी पोस्टिंग हुई है मुझे कृषि भूमि की जानकारी नहीं थी। बाद में ग्रामीणों ने बताया तो कार्यवाही रजिस्टर का निरीक्षण करने पर इसकी जानकारी मिली साथ ही इसे 2045 तक लीज पर देने की बात भी पता चली तब बीईओ को इसकी जानकारी देकर मार्गदर्शन लिया। जिसके बाद सुरेंद्र तिवारी की लीज समाप्त कर दी गई है और बैंक का खाता भी खुलवाने प्रक्रिया शुरू कर दी है।
    रवि शंकर कौशिक प्रधान पाठक पूर्व माध्यमिक शाला सागर।
    वहां भ्रष्टाचार होने की सूचना मिली है इसीलिए जांच करा रहा हूं। जांच रिपोर्ट आने पर दोषियों पर कारवाई की जाएगी।
        कामेश्वर बैरागी बीईओ तखतपुर।

          अब देखना यह है कि दान की जमीन के मामले में हुए बहुत बड़े खेल का रिजल्ट जांच कमेटी का निर्णय जमीनी स्तर पर कितनी सच्चाई को सामने लाकर रख पाता है….
        तब तक के लिए नारायण नारायण…😊

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